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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ के माध्यम से जन्म के समय गरिमा और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल को बढ़ावा देना है।

बच्चे के जन्म के समय की देखभाल ना सिर्फ माँ के लिए बल्कि जन्म लेने वाले बच्चे के लिए भी बहुत स्वास्थ्य वाला होता है। भारत सरकार ने 22 जनवरी, 2015 को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) योजना घटते बाल लिंगानुपात और व्यापक लिंग आधारित भेदभाव के जबाव में शुरू की गई थी। यह योजना महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय की संयुक्त पहल है।

यह योजना अब एक जन-आंदोलन बन चूका है। यह पहल बालिका के जन्म के समय उसकी गरिमा, सुरक्षा, प्रारंभिक बाल्यावस्था और शिक्षा तक उसकी पहुँच के महत्व को रेखांकित करते हुए उसके समग्र विकास के लिए अनुकूल वातावरण के निर्माण को प्रोत्साहित करती है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय  के आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर जन्म के समय लिंग अनुपात 2014-15 में 918 से बढ़कर 2025-25 में 929 हो गया है। शिक्षा मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का नामांकन 2014-15 में 75.51% से बढ़कर 2024-25 में 80.2% हो गया है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना सुरक्षित और गरिमापूर्ण जन्म से शुरू होकर प्रारम्भिक बचपन की देखभाल सुनिश्चित करने और लड़कियों की शिक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है।

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source: PIB

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