इस अवसर पर राज्य सभा में विपक्ष के नेता, श्री मल्लिकार्जुन खरगे; राज्य सभा के उपसभापति, श्री हरिवंश; संसद सदस्य; पूर्व सदस्य और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को पुष्पांजलि अर्पित की।
लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने 23 जुलाई को लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती के अवसर पर संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
लोक सभा के महासचिव, श्री उत्पल कुमार सिंह और राज्य सभा के महासचिव, श्री पी.सी. मोदी ने भी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को श्रद्धांजलि अर्पित की।
लोकमान्य के नाम से प्रसिद्ध श्री बाल गंगाधर तिलक प्रखर राष्ट्रवादी, दूरदर्शी नेता, समाज सुधारक और विद्वान थे। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान आमजन में राजनीतिक चेतना जागृत करने में अग्रणी भूमिका निभाई । वह स्वराज के प्रबल समर्थक थे और उनके प्रेरक आह्वान—“स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूँगा!”—ने देशवासियों को औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया।
राष्ट्र के प्रति लोकमान्य तिलक के असाधारण योगदान के सम्मान में संविधान सदन (तत्कालीन संसद भवन) के केंद्रीय कक्ष में उनके चित्र का अनावरण 28 जुलाई 1956 को तत्कालीन प्रधान मंत्री, पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा किया गया था।
इससे पहले, लोक सभा अध्यक्ष, श्री ओम बिरला ने X पर दिए गए संदेश में भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में लोकमान्य तिलक की महत्वपूर्ण भूमिका और जनसेवा की उनकी विरासत का स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा, ” उनका जीवन राष्ट्रभक्ति, निर्भीकता और वैचारिक दृढ़ता की अनुपम मिसाल है।”
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने लोकमान्य तिलक को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की है। श्री मोदी ने कहा है कि वे एक अग्रणी नेता थे जिन्होंने अटूट विश्वास के साथ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की भावना को प्रज्वलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा:
“लोकमान्य तिलक को उनकी जयंती पर शत-शत नमन। वे एक अग्रणी नेता थे जिन्होंने अटूट विश्वास के साथ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की भावना को प्रज्वलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे एक उत्कृष्ट विचारक भी थे जो ज्ञान की शक्ति और दूसरों की सेवा में विश्वास करते थे।”
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