एमएसएमई को विस्तार, प्रतिस्पर्धात्मकता और वैश्विक एकीकरण के लिए मज़बूत बनाना । मुख्य बिंदु केंद्रीय बजट 2026–27 में भारतीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को “चैंपियन” के रूप में विकसित करने के लिए त्रिस्तरीय दृष्टिकोण का प्रस्ताव किया गया है, जिसके तहत एमएसएमई को इक्विटी, तरलता और पेशेवर सहायता प्रदान की जाएगी। बजट में कूरियर निर्यात पर प्रति खेप 10 लाख रुपये की वर्तमान …
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एमएसएमई की क्रांति बदल रहा है : भारत का आर्थिक परिदृश्य।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है, जो 2020-21 में ₹3.95 लाख करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹12.39 लाख करोड़हो गई है, जो भारत की अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देने और वैश्विक व्यापार को सुदृढ़ करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। 2024-25 में निर्यात करने वाले एमएसएमई की कुल संख्या भी 2020-21 में 52,849 से बढ़कर 2024-25 में 1,73,350 हो गई है। [1] एमएसएमई ने एक शानदार विकास पथ का निर्माण किया है, जो कि 2023-24 में निर्यात में 45.73% का योगदान देता था, वो मई 2024 तक बढ़कर 45.79% हो गया, जो भारत के व्यापार प्रदर्शन पर उनके बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करता है। भारत में एमएसएमई क्षेत्र ने लगातार शानदार परिवर्तनशीलता और अनुकूलन क्षमता का प्रदर्शन किया है, जो बीते कुछ वर्षों में देश की जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। भारत की जीडीपी में एमएसएमई की ओर से सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) 2017-18 में 29.7% था, जो 2022-23 में बढ़कर 30.1% हो गया। यहां तक कि कोविड-19 महामारी से आने वाली अभूतपूर्व चुनौतियों के बीच भी, इस क्षेत्र ने 2020-21 में 27.3% का योगदान बनाए रखा, जो 2021-22 में बढ़कर 29.6% हो गया। ये आंकड़े आर्थिक विकास और स्थिरता को आगे बढ़ाने में …
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