17 सितम्बर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारका स्थित यशोभूमि में SEMICON इंडिया 2026 का उद्घाटन किया, जिसका समापन 19 सितम्बर को हुआ । यहाँ तीन दिनों तक भारत में सेमीकंडक्टर मतलब चिप निर्माण की पूरी कहानी दुनिया के सामने होगी। भारत ने सेमीकंडक्टर की दुनिया में 10 साल पहले कदम रखी थी।
इस साल SEMICON इंडिया की थीम है :- सिलिकॉन से सिस्टम तक : पूरा इकोसिस्टम बनाना।
आइये जानते है की ये सिलिकॉन से बनी चिप क्या कर सकती है। चिप का आकार डाक टिकट से भी छोटे आकार का होता है उस पर ट्रांजिस्टर है, जो हर सेकंड अरबों बार चालू या बंद हो सकते है। एप्पल की A19 Bionic चिप 3 नैनो मीटर तकनीक से बनी है। इतनी छोटी सी सतह पर इसमें करीब 30 अरब ट्रांसजिस्टर लगे है। इसका उपयोग कारो, ड्रोन, विमानों, MRI मशीनो और उपग्रहों तक में लगी होती हैं।
पुरे दुनिया में इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग लगभत 4.3 ट्रिलियन डॉलर का है और तेजी सी बढ़ रहा है । भारत में 2014-15 में लगभग 1.9 करोड़ रुपये के इलेक्ट्रॉनिक सामान का उत्पादन होता था। 2025-26 तक यह बढ़कर 13.11 करोड़ रुपये का हो गया। यानि लगभग 7 गुना बढ़ोतरी हुआ।
semicon इंडिया 2026 का आयोजन 19 सितम्बर तक यशोभूमि, नई दिल्ली में हो रहा है। इसमें 600 से अधिक कंपनियां भाग ले रही है और लगभग 50,000 आगंतुकों के पहुंचने की उम्मीद है। कार्यक्रम में 52 देशों के प्रतिनिधि, 400 से अधिक अधिकारी/ वरिष्ठ उद्योग प्रतिनिधि और 150 से अधिक वक्त शामिल है।
प्रदर्शनी में जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापूर और स्वीडन के छह कंट्री पवेलियन, स्टार्टअप पवेलियन, इनोवेशन शोकेस, स्टूडेंट हैकथॉन और वर्कफोर्स डेवलपमेंट पवेलियन भी शामिल है।
इस अवसर पर भारत के पहले स्वदेशी System-on-Module IndieSemiC के ISC VegaSOM की घोषणा की।
19 सितम्बर को RISC-V नवाचार, AI और क्वांटम प्लेटफॉर्म, फैब ऑटोमेशन, start-up भागीदारी और वर्कफोर्स डेवलेपमेंट से जुडी 15 प्रमुख घोषणाएं की गई।
C2S प्रोग्राम के तहत ‘डिजिटल इंडिया RISC-V ग्रैंड चैलेंज’ स्वदेशी प्रोसेसर पर आधारित समाधान विकसित करने के लिए तीन टीमों को प्रदान किया गया।
डिजिटल इंडिया RISC-V ग्रैंड चैलेंज के विजेताओं में प्रथम पुरुस्कार SASTRA यूनिवर्सिटी, तंजावुर के टीम डिजिटल डॉग्स का प्रतिनिधित्व करने वाली MV साई टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड ने आईआईटी मद्रास द्वारा विकसित स्वदेशी ‘शक्ति’ प्रोसेसर का इस्तेमाल करके पानी की सतह को अपने आप साफ़ करने वाला एक रोबोट बनाया है। इस रोबोट को तालाबों और मंदिरों के कुंड जैसे जल निकायों के साफ़ करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
दूसरा पुरुस्कार तिरुवंतपुरम के ER and DCI इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी को जबकि तीसरा पुरुस्कार बेंगलुरु के इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस की टीम को मिला।
source : PIB
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