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भूजल संसाधनों का उपयोग।

सरकार इस तथ्य से अवगत है कि भारत दुनिया में भूजल के सबसे बड़े उपयोगकर्ताओं में से एक है और देश के पास अपनी आबादी की आवश्यकतओं को पूरा करने के लिए दुनिया के ताजे पानी का लगभग 4 प्रतिशत भंडार है, जो दुनिया के कुल जल का लगभग 17 प्रतिशत है। वर्ष 2023 के लिए भूजल संसाधन आकलन रिपोर्ट के अनुसार, देश के लिए कुल वार्षिक निकालने योग्य भूजल संसाधन 407.21 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) और कुल वार्षिक भूजल निष्कर्षण 241.34 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) आंका गया है। जल राज्य का विषय होने के कारण, भूजल सहित जल संसाधनों के विकास, विनियमन और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे मुख्य रूप से राज्य सरकारों का दायित्व हैं। केंद्र सरकार अपने संस्थानों और विभिन्न केंद्र प्रायोजित योजनाओं के माध्यम से तकनीकी सहायता और वित्तीय सहायता प्रदान करके राज्य सरकारों के प्रयासों को पूरा करती है। देश में बेहतर और अधिक कुशल जल प्रबंधन प्रणाली के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कुछ महत्वपूर्ण उपाय नीचे सूचीबद्ध हैं: जल संसाधन विभाग, नदी विकास और गंगा कायाकल्प (आरडी और जीआर) विभाग द्वारा तैयार की गई राष्ट्रीय जल नीति (2012) में एक ऐसी कृषि प्रणाली विकसित करने की परिकल्पना की गई है जो पानी के उपयोग को कम करती है और पानी से अधिकतम मूल्य प्राप्त करती है। यह नीति मुख्य रूप से पानी की बर्बादी को रोकने पर केंद्रित है। इसमें अन्य बातों के अलावा, रसोई और बाथरूम से शहरी जल अपशिष्टों के पुन: उपयोग की वकालत की गई है और रीसाइक्लिंग / पुन: उपयोग के लिए औद्योगिक प्रदूषकों को नष्ट करने को प्रोत्साहित करती है। नीति को अपनाने के लिए सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के संबंधित मंत्रालयों/केंद्र सरकार के विभागों को निर्देश भेज दिया गया है। देश में सिंचाई, घरेलू जल आपूर्ति, नगरपालिका और/या औद्योगिक उपयोगों में पानी के कुशल उपयोग को प्रोत्साहन देने के लिए राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम की योजना बनाने और निष्पादित करने के लिए जल शक्ति मंत्रालय (एमओजेएस) के अंतर्गत जल उपयोग दक्षता ब्यूरो (बीडब्ल्यूयूई) की स्थापना की गई है। जल उपयोग दक्षता ब्यूरो (बीडब्ल्यूयूई) को जल संरक्षण कोड के लिए दिशानिर्देश निर्धारित करने; जल कुशल फिक्स्चर, उपकरण, सेनेटरी सामान आदि के लिए मानक विकसित करने; जल और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में दक्षता लेबलिंग/ब्लू लेबलिंग की एक प्रणाली विकसित करने; राज्यों के साथ सहयोग करने का दायित्व दिया गया है। भूजल निकासी के नियमन और नियंत्रण के उद्देश्य से जल शक्ति मंत्रालय (एमओजेएस) के अंतर्गत केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) का गठन किया गया है। देश में भूजल के संग्रहण सह उपयोग को केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) द्वारा दिनांक 24.09.2020 के अपने दिशानिर्देशों के प्रावधानों के अनुसार अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करके विनियमित किया जाता है, जो पूरे भारत में लागू है। दिशानिर्देशों के अनुसार, 20 केएलडी या अधिक भूजल खींचने वाली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए एसटीपी स्थापित करना और उपचारित पानी का उपयोग ग्रीनबेल्ट विकास/कारों की धुलाई आदि के लिए करना आवश्यक है। इसके अलावा, 100 केएलडी से अधिक भूजल निकालने वाले उद्योगों को द्विवार्षिक जल लेखा परीक्षण करना आवश्यक है, जिसमें पुनर्चक्रण/पुन: उपयोग के माध्यम से पानी की खपत में कमी की सिफारिश की गई है। भारत सरकार, राज्यों के साथ साझेदारी में, देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को निर्धारित गुणवत्ता और नियमित और दीर्घकालिक आधार पर पीने योग्य नल से जल आपूर्ति प्रदान करने के लिए अगस्त, 2019 से जल जीवन मिशन (जेजेएम) लागू कर रही है। जल जीवन मिशन (जेजेएम) के अंतर्गत, पानी की कमी वाले क्षेत्रों के गांवों के लिए, बहुमूल्य ताजे पानी को बचाने के लिए, राज्यों को दोहरी पाइप जलापूर्ति प्रणाली के साथ नई जल आपूर्ति योजना की योजना बनाने के लिए पानी का उपचार करने को प्रोत्साहित किया जा रहा है, यानी एक पाइप में ताज़े पानी की आपूर्ति और ग्रे/अपशिष्ट जल, गैर-पीने योग्य/बागवानी/शौचालय फ्लशिंग उपयोग के लिए दूसरे पाइप में आपूर्ति की जाएगी। भारत सरकार 2019 से देश में जल शक्ति अभियान (जेएसए) लागू कर रही है जो मुख्य रूप से कृत्रिम पुनर्भरण संरचनाओं, वाटरशेड प्रबंधन, पुनर्भरण और पुन: उपयोग संरचनाओं, गहन वनीकरण और जागरूकता सृजन आदि के माध्यम से मानसून वर्षा की प्रभावी कटाई पर केंद्रित है। 5वां संस्करण मार्च 2024 में मंत्रालय द्वारा ‘नारी शक्ति से जल शक्ति’ विषय के साथ 2024-25 के लिए जल शक्ति अभियान (जेएसए) शुरू किया गया है। जल शक्ति मंत्रालय (एमओजेएस) ने 7 राज्यों की 8213 जल संकटग्रस्त ग्राम पंचायतों में अटल भूजल योजना शुरू की है, जो भूजल के मांग पक्ष प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करते हुए भागीदारीपूर्ण भूजल प्रबंधन के लिए एक समुदाय के नेतृत्व वाली योजना है। इस योजना के अंतर्गत, अन्य बातों के अलावा, राज्यों को जल कुशल कृषि पद्धतियों जैसे ड्रिप/स्प्रिंकलर को अपनाना, कम पानी वाली फसलों के लिए फसल विविधीकरण, मल्चिंग आदि को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसके अलावा, कई राज्यों ने जल संरक्षण/संचयन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है जैसे राजस्थान में ‘मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान’, महाराष्ट्र में ‘जलयुक्त शिबर’, गुजरात में ‘सुजलाम सुफलाम अभियान’, तेलंगाना में ‘मिशन काकतीय’ , आंध्र प्रदेश में ‘नीरू चेट्टू’, बिहार में ‘जल जीवन हरियाली’, हरियाणा में ‘जल ही जीवन’ और तमिलनाडु में ‘कुदिमारमथ’ योजना आदि। उपरोक्त के अलावा, भारत सरकार ने देश में भूजल की स्थिति में सुधार के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण पहल की हैं जिन्हें नीचे दिए गए लिंक के माध्यम से देखा जा सकता है। https://jalshakti-dowr.gov.in/document/steps-taken-by-the-central-government-to-control-waterdepletion-and-promote-rain-water-harvesting-conservation/ केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री श्री राज भूषण चौधरी ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। *****

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कोयला आयात में कमी, निर्यात में वृद्धि।

कोयला आयात में कमी लाने और कोयला निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कोयला मंत्रालय एक परिवर्तनकारी पहल का नेतृत्व कर रहा है और देश के ऊर्जा परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला रहा है। इस रणनीतिक कदम का उद्देश्य घरेलू कोयला उत्पादन को बढ़ाना, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और कोयला क्षेत्र के विकास को समर्थन देना है। भारत के …

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कोचिंग रिटर्न देने वाला एक समृद्ध उद्योग बन गया है – श्री जगदीप धनखड़।

कोचिंग कल्चर किसी ‘गैस चैंबर’ से कम नहीं रह गया है- श्री जगदीप धनखड़ कोचिंग सेंटरों द्वारा अखबारों के विज्ञापनों पर किए जा रहे भारी-भरकम खर्च की जांच की जानी चाहिए- श्री जगदीप धनखड़ श्री जगदीप धनखड़ ने अफसोस जताते हुए कहा कि चैंबर में चर्चा के लिए सभापति के अनुरोध को सदन के नेताओं द्वारा अस्वीकार और बहिष्कार करना …

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